Monday, April 16, 2012

Love

वक़्त की रफ़्तार भी जेसे थम सी गयी है,

थम न जाये मेरी सांस काश तुम आ जाओ?

आज कुछ वक़्त के लिए पास मेरे काश तुम आ जाओ?

बोहत तनहा हूँ मैं आज काश तुम आ जाओ?

कभी खुद को इतना कमज़ोर न होने दिया मैं ने,

पर आज बिखर गया हूँ काश तुम आ जाओ?

तुम से मिलते ही मिलता है होसला हर पल मुझे,

चाहिए आज, बाँहों का सहारा काश तुम आ जाओ?

बरसों से जीता आया हूँ बिन तेरे ए जान’इ'वफ़ा,

आज नहीं गुज़र रहा एक पल काश तुम आ जाओ?

वक़्त की रफ़्तार भी जेसे थम सी गयी है,

थम न जाये मेरी सांस काश तुम आ जाओ?



By  
Vicky Kumar

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